अक्सर
सोच से विपरीत
होता है घटित
बहुत कुछ...
अक्सर
कल्पना के केनवास
में नहीं भर पाते
मनचीते
इन्द्रधनुषई रंग...
अक्सर
नहीं पढ़ पाते
अंतिम क्षण तक
नेह की परिभाषा
हमारे चंचल नयन..
अक्सर
काट दिए जाते हैं
ऊड़ान से पूर्व...
हौसले के पंख
अक्सर
मटमैला हो जाता है
ऑंखों से छलक गया
अश्रुजल
गालों पर जमा पसीने
की खार से
...मगर अक्सर
आंधियां भर देती हैं
हौसला
देहरी पर रखे
दीपज्योति में - तुम देखना
इस बार भी
नई उड़ान देगी मुझे
पर करतने की
हर साजिश