पेपर वेट

वीरेन्‍द्र गोयल

शुक्र है
उसने मारा पेपर वेट
अरे भाई
मारा नहीं फेंका
अगर न चूकता
तो कोई भी अंग
हो जाता भंग
संसद की तरह
जुड़ने में वक्त लगता
और जैसा आया है
वैसा कहाँ जुड़ता
मान लो
हाथ में कुछ और होता
यानी टाइप राइटर
पेन स्टेड
यानि साथ खड़े सिपाही की बंदूक
तब क्या करते
वहीं पर ढेर होने के अलावा
क्या चारा था

आपके बंधे हैं हाथ
नीचे उतरकर
नहीं मार सकते लात
उनके हाथ
बंधे रहकर भी खुले हैं
खून करके भी
दूध के धुले हैं
आपके मुँह पर है पट्टी
उनके हाथ में है टट्टी
फेंक देंगे आप पर
उच्चारेगें
माँ बहन की गालियाँ

क्या करोगे
भेज दोगे जेल
उस में तो वो
पहले से ही है
चाहे नहीं वो शरमिंदा
शुक्र है आप है जिंदा
सुख दुख हानि लाभ
मान अपमान
सब विधि हाथा
करते रहा कर्म अपना
लिखेगा भाग्य विधाता ।