रोज बरामद होते हैं चाकू
और बोतले शराब की
अध्धे, पव्वे, पाऊ च
इतनी चौकसी के बाद भी
खबर हमेशा
मिलती है मुखबिर खास से
मौजूद रहता है जो
हर जगह
कोई नहीं देख पाता उसे
बस एक इशारा
कभी वो ऊं गली उठाता है
कभी सिर पर हाथ फिराता है
बस दबोच लिया जाता है गरीब
आखिर ये कौन सी जाति है
सूंघ लेती है शराब
झांक लेती है अदृश्य शक्ति से
दाहिनी पेंट की ढब
उसका इशारा
करता है निर्धारित
उसकी जद में
आने वाले का भाग्य
काल जैसे
समय पर सवार होकर
निकलता है कोड़ा लेकर
फटकारता है हवा में
गुंजाता चारों दिशाओं में
प्रति ध्वनियों से
गिर पड़ते है घुटनो के बल
प्रायश्चित करते हुए
बांध लिये जाते है फिर भी
अंगूठों से
फिरते रहते है बाद में
छुड़वाते अपनी पहचान ।