कविता

भाइयों में आज सुनाऊं, सप्रेजी की अमर कहानी

माधवराव के नाम से जुड़ी, हिंदी की यह जन्मकहानी
19 जून 1871 का पिथौरा में जन्म हुआ
कोडोपंत जी ने बच्चे को माधवराव नाम दिया
ओल्ड सी पी एंड बेरार में हिंदी सूर्य का उदय हुआ
1881 में माधव का दाखला अंग्रेजी स्कूल में हुआ
मिडिल में सर्वोच्च 7 रु. छात्रवृत्ति थी पानी
भाइयों मैं आज सुनाऊं, सप्रेजी की अमर कहानी
भारतियों को तब अंग्रेजी पढ़ाते दास बनाने को
लोग भी बच्चों को भेजते, भविष्य बनाने को
1890 में माधव ने एन्ट्रेस पास कर वजीफा पाया
साथ ही 18 वर्ष की आयु विवाह बंधन में पाया

1896 में उनके इंटर पास की खबर थी आनी
सुना रहा हूं, क्रमवार, सप्रेजी की अमर कहानी
कलकत्ते में जाकर ली, 1898 में बी ए की उपाधि
आकर हिंदी की सेवा में लग गया माधव
प्रथम हिंदी कहानी का लेखक कहाया माधव
सन 1900 की जनवरी में, पेंडरा के मासिक की कहानी
सुन लीजिए छत्तीसगढ़ मित्र के जन्म की कहानी
हर अंक विविधता पूïर्ण, कहानी थी कविता थी
लेख था, जीवन थी, पुस्तक समीक्षा भी थी
सब विधा युक्त था, संपादक सप्रेजी थे
छत्तीसगढ़ मित्र को तीन वर्ष सम्हाले सप्रेजी थे।

1906 में हिंदी ग्रंथमाला के प्रकाशन की ठानी
सुना रहा हूं, क्रमवार सप्रेजी की अमर कहानी
बाल गंगाधर तिलक का केसरी मराठी में था
पूरे भारत में विचार फैलाने हिंदी करना जरुरी था
1907 में नागपुर से हिंदी में केसरी प्रारंभ हुआ
इसी कारण लल्ली प्रसाद पांडेय जी से संपर्क हुआ
केसरी के अनुवादक को जेल की हवा थी खानी
1908 के समय की है यह सप्रेजी की अमर कहानी
मराठी के अद्भूत ग्रंथों का अनुवाद किया  read more »

यक्ष भाषा

पर यक्ष जिस भाषा में पूछेगा प्रश्न
वह तो सीखनी रह ही गई
मां के दूध के साथ
तुतलाहट भरी
सीख ली थी वह पहाड़ी बोली
विद्वान जिसे कहते रहे अपभ्रंश
नारियल की फटी टाट पर
कौवे की क...का...पंचम स्वर में चलती रहती

जब तक घिस नहीं जाता था पाजामा  read more »

कविता बंजारन सी

बंजारन सी कविता।
पंख लगार सपनों के वो,
भ्रमण करे सारी सृष्टि,
जीवन के सूने पतझर में,
करे सदा अमृत वृष्टि,
होठों पे मुस्कान अमर सी, आंखों में बहती सरिता,
बंजारन सी कविता।
छान्द बने पायलिया इसकी,
लय चुनर सी लहराती,  read more »

तेरी आंखों में संसार

तेरी आंखों में संसार।
प्रेम पर निबंध लिखती,
भीनी-भीनी सी पवन,
आसमां देता निमंत्रण,
उडऩे को आतुर है मन,
पूछता है प्राण मुझसे,
कितना पांखों का विस्तार।
तेरी आंखों में संसार।

महक उठा मन का उपवन,
मधुर मिलन मदहोश घड़ी,  read more »

इस कोने में

काल का कबाड़-घर
काल के कबाड़घर में
पता नहीं कितना
कबाड़ भरा है।

इधर, इस कोने में
श्री-श्री 108, 1008
महामंडलेश्वर,
महाराजाधिराज, भूपति,
अखिलेश्वर,
योद्धा देहधारी,
आतंकी, आततायी,
भक्तगण, पंडे-पुजारी,
नेता-अभिनेता,
शब्द-शिल्पी साहित्यकार,
साधक, आराधक,
निपुण कलाकार,
चारण-भाट, दरबारी,
सामन्त और श्रीमन्त,
दस, बीस, तीस हजारी,
जाने कितने भरे हैं।  read more »

आखिरी दिनों में

टूटकर कभी जुड़ता
नहीं
आपसी विश्वासों पर
खड़ा है
दुनिया के किसी भी
बचत बैंक से
बड़ा है
गुल्लक बिटिया का

अक्सर टूट जाता है
अब
माह के
आखिरी दिनों में
मां कहती है
नया
खरीदकर लायेंगे
पहले से
ज्यादा पैसे बचायेंगे  read more »

प्रगति

इन तमाम वर्षों में याने
पिछले साठ वर्षों में
देश की प्रगति
सिर्फ पत्थरों में हुई
शिलालेख लिख गए
स्मारक बन गए
जगह-जगह शिलान्यास हो गया  read more »

हरितक्रांति

हरित क्रांति का निरीक्षण
करते-करते
कभी ऊपर देखते, कभी नीचे देखते
आजू-बाजू की हरियाली निहारते
देश के कृषि मंत्री महोदय
मंूगफल्ली के खेत में पहुंचे
और लहलहाती फसल देखकर
किसान से पूछे
फल कहां है?
मुझे तो लगता है  read more »

पेपर वेट

वीरेन्‍द्र गोयल

शुक्र है
उसने मारा पेपर वेट
अरे भाई
मारा नहीं फेंका
अगर न चूकता
तो कोई भी अंग
हो जाता भंग
संसद की तरह
जुड़ने में वक्त लगता
और जैसा आया है
वैसा कहाँ जुड़ता
मान लो
हाथ में कुछ और होता
यानी टाइप राइटर
पेन स्टेड
यानि साथ खड़े सिपाही की बंदूक
तब क्या करते
वहीं पर ढेर होने के अलावा
क्या चारा था  read more »

मुखबिर

वीरेन्‍द्र गोयल

रोज बरामद होते हैं चाकू
और बोतले शराब की
अध्धे, पव्वे, पाऊ च
इतनी चौकसी के बाद भी
खबर हमेशा
मिलती है मुखबिर खास से
मौजूद रहता है जो
हर जगह
कोई नहीं देख पाता उसे  read more »

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