यौवन की कस्तूरी ने दे दी तेरी गंध।
मन पागल हुआ बोला, पीने दे मकरंद॥
ऐसी सुरभि को बिखरा, जाओ न तनिक दूर।
पर आलिंगन लालसा, करो न चकनाचूर॥
बाब कट इन केशों से, दमका तेरा रूप।
मैं तेरी छाया बनूं, तू मेरी धूप॥
तनखाह ने बदल दिया, गोरी का व्यवहार। read more »