साक्षात्‍कार

मैंने साम्प्रदायिक एकता पर बल दिया है

वरिष्ठ प्रगतिशील कवि डॉ. मलखान सिंह सिसौदिया से डॉ. राजेश कुमार की बातचीत

मैं डॉ. मलखान सिंह सिसौदिया के आवास पर एटा पहुँचा। उनसे मिलने के लिए मैंने डोर बैल बजाई। अन्दर से श्रीमती गार्गी देवी (सिसौदिया जी की पत्नी) ने कमरे का दरवाजा खोला। मैंने उनके चरण छुए, उन्होंने मुझे बैठने को कहा। मैं सोफे पर बैठ गया। मैंने डॉ. सिसौदिया जी के बारे में पूछा। वे बोलीं - प्रतीक्षा कीजिए, डॉ. साहब अभी आ रहे हैं।

साफ-सुथरे कमरे में टंगा अभिनन्दन-पत्र सिसौदिया जी के कवि-व्यक्तित्व की प्रगाढ़ता को व्यंजित कर रहा था। सिसौदिया जी की कुछ कविताओं का स्मरण कर मैं विचारमग्न हुआ ही था कि सिसौदिया जी ने कमरे में प्रवेश किया।  read more »

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